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Jamshedpur Research Review: Most reputed journal of Eastern India since 2012

Note on Jamshedpur Research Review The Jamshedpur Research Review (JRR) is a distinguished, government-registered, peer-reviewed, multi-disciplinary research journal based in Jamshedpur, Jharkhand, India. Established in 2012, it is published bi-monthly by the Gyanjyoti Educational and Research Foundation, with a focus on fostering empirical research and providing a platform for scholars, academicians, NGOs, entrepreneurs, and social activists to showcase their work. The journal is registered with the Registrar of Newspapers in India (RNI: JHAENG/2013/53159) and holds an ISSN of 2320-2750, reflecting its adherence to international publishing standards. JRR is recognized as one of the most reputed and regularly published research journals in eastern India, particularly in Jharkhand. Since its inception, it has consistently released issues without interruption, reaching Year 12, Volume 6, Issue 69 (January-February 2024) and beyond. Its commitment to timely publication and rigorous peer-...

JAMSHEDPUR RESEARCH REVIEW

Visit us at : www. jamshedpurresearchreview.com The *Jamshedpur Research Review* (JRR) plays a significant role in advancing higher education and research in Jharkhand through several key contributions: ### 1. **Platform for Scholarly Research** Established in 2012, JRR is a government-registered, peer-reviewed, and multidisciplinary research journal published bimonthly in English. It provides a platform for academicians, researchers, and students to publish original research across various disciplines, thereby fostering a robust research culture in the region. ([Scribd][1]) ### 2. **Regional Focus and Relevance** JRR emphasizes research pertinent to Jharkhand and its surrounding areas. For instance, it has published studies on the socio-economic conditions of communities in the Kolhan region, offering insights into local issues and contributing to region-specific knowledge. ([jamshedpurresearchreview.blogspot.com][2]) ### 3. **Academic Collaboration and Networking** The jour...

Pingaksh मिथिलेश के नवीनतम उपन्यास पिंगाक्ष की समीक्षा

Visit us at : www. jamshedpurresearchreview.com वर्तमान मे मिथिलेश चौबे ऐतिहासिक उपन्यासों के मामले मे देश के सबसे बेहतरीन लेखकों में से एक है. उनकी शैली की तुलना आप आचार्य चतुरसेन शास्त्री या जयशंकर प्रसाद के ऐतिहासिक उपन्यासों से या नाटकों से ना करें . डॉ. मिथिलेश चौबे की अपनी शैली है जिसमें वह शोध आधारित निष्कर्ष को बहुत ही कुशलता के साथ अपने उपन्यासों में समाहित करते हैं. डॉ. मिथिलेश चौबे के लेखन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह बहुत ही रोचक तरीके से आपको भारत के इतिहास से परिचित करा देते हैं. भारत के इतिहास के हिस्से जिन पर अभी तक इतिहासकारों की नजर भी नहीं गई है उन हिस्सों पर मिथिलेश चौबे के उपन्यास आधारित होते हैं. चाहे वह उनका पहला उपन्यास'सन 80'हो जो जमशेदपुर के 80 और 90 के दशक के इतिहास को बहुत ही खूबसूरत तरीके से लोगों के सामने प्रस्तुत करता है, या उनके द्वारा लिखित कोल्हानम. कोल्हानम एक बहुत ही अद्भुत उपन्यास है. इस उपन्यास की सबसे बड़ी विशेषता लेखक का अलग-अलग दृष्टिकोण से ऐतिहासिक घटनाओं को समझने तथा झारखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में आदिवासियों और गैर आदि...

Kolhanam(Novel) Readers and experts opinion कोल्हानम -पाठकों की राय

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Visit us at : www. jamshedpurresearchreview.com kolhanam(Novel) Readers and experts opinion (छोटानागपुर पठार की जनजातियों के सनातन संपर्कों की ईसा-पूर्व 100 की महागाथा) .कोल्हानम का एक अंश कोल्हानम उपन्यास यहाँ ख़रीदे- कोल्हानम का विवरण पाठकों एवं समीक्षकों की राय- एक सांस में आप पढ़ सकते हैं। रोचक भी है और रहस्यपूर्ण भी- "रहस्य और इतिहास में लिपटी हुई यह कथा आदिवासी बनाम सनातन के अंतरसंबंधों की पड़ताल करती है। क्या मुंडेश्वरी का मुंडाओं से कोई संबंध है? विंध्याचल देवी किसकी आराध्या हैं? वैदिक असुर से झारखंड के असुर के बीच कोई तादात्म्य है? इस तरह के तमाम सवाल हैं? वैदिक युग से लेकर आज तक इसका विस्तार है। विंध्याचल मुंडेश्वरी धाम से लेकर मगध तक। जैन, बौद्ध छोटानागपुर के पठार पर क्यों बसे। जैनियों का नागवंश से कुछ तो संबंध है? क्या इसके पीछे कोई इतिहास, मिथ या लोकश्रुति है? अशोक को लेकर उस मिथ पर भी नई रोशनी कि कलिंग युद्ध के बाद वह बौद्ध बना जबकि यह उपन्यास बताता है कि वह बहुत पहले ही बौद्ध बन गया था। और भी बहुत कुछ है। एक सांस में आप पढ़ सकते हैं। रोचक भी है...

सन् अस्सी : एक दशक का दस्तावेज़ ।

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Visit us at : www. jamshedpurresearchreview.comसन् अस्सी : एक दशक का दस्तावेज़ पुस्तक समीक्षा : दिव्येंदु त्रिपाठी लेखक, वास्तु-विशेषज्ञ, सलाहकार। प्रोटो और प्राचीन इतिहास में रुचि, और प्राचीन पवित्र ग्रंथ by Divyendu Tripathy Writer ,vastu-expert ,Adviser. Interested in proto and ancient history, and ancient holy scriptures. Ph-9263567691. -------------------------------- "सन् अस्सी "डा मिथिलेश चौबे द्वारा लिखित और बहुचर्चित उपन्यास है जोकि अस्सी के दशक वाले जमशेदपुर के सामाजिक परिवेश का एक अनुप्रस्थ-चित्र (cross sectional picture) प्रस्तुत करता है । "अनुप्रस्थ चित्र" एक जैव वैज्ञानिक शब्द है जोकि किसी कोशिका(cell) या ऊतक( tissue) के अनुप्रस्थ काट से संबंधित है जिसमें उसके एक हिस्से की अंदरूनी तस्वीर दिखलाई जाती है। यह उपन्यास भी ठीक उसी तरह से जमशेदपुर का एक अनुप्रस्थ चित्र दिखलाता है और वह चित्र अस्सी के दशक का है। तब हमारा टाटानगर बिहार का ही एक हिस्सा हुआ करता था और वह अपने बहुप्रदेशीय जनबसाव की सघनता की ओर बढ रहा था । उन अनेक प्रदेशों के लोगों में...

मरते मीडियाकर्मी : डूबता न्यूज मीडिया

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Visit us at : www. jamshedpurresearchreview.com मरते मीडियाकर्मी : डूबता न्यूज मीडिया Dr. Mithilesh Choubey Novelist and Editor JRR ISSN-2320-2750 एक तरफ कोरोना की महामारी ने हजारों पत्रकारों के सामने बेरोजगारी और भुखमरी की स्थिति पैदा कर दी है तो दूसरी प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में पत्रकार इस महामारी के शिकार हो रहे हैं. एक अनुमान के अनुसार पिछले साल करीब 25% पत्रकारों की नौकरी गई थी. इस साल कोरोना की दूसरी लहर में भी अधिकतर अख़बारों की मानव संसाधन शक्ति पिछले वर्ष की तुलना में आधी हो गई है. अधिकतर मिडिया घराने अब स्ट्रिंगरस, स्वतंत्र पत्रकारों या कहें तो फ्री लानसेर्स के भरोसे समाचार संकलन करा रहे है. स्वतंत्र रूप से काम करने वाले तथा रिपोर्ट के आधार पर भुगतान पाने वाले इन पत्रकारों की हालत सबसे ख़राब है. खबर संकलन के क्रम में वे और उनके परिवार वाले कोरोना से लगातार संक्रमित हो कर अपनी जान गवां रहे हैं. स्वतंत्र होने की वजह से उन्हें अखबार या सरकार से कोई मुआवजा नहीं मिलता. फर्स्ट पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष 58 पत्रकार अपनी जान गवां चुके हैं. पिछले वर्ष कोरोना...

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कोल्हानम छोटानागपुर के पठार में सनातन संपर्को को तलशती ईसापूर्व 2000 की रहस्यमय ऐतिहासिक कथा!! कोल्हानम को घर बैठे मंगाने का तरीका: निम्नलिखित बैक खाते में 300 रूपये जमा करें तथा भुगतान की रसीद editorjrr@gmail.com अपने पते के साथ मेल कर दें. In favour of: Jamshedpur Research Review • Account No-33673401796, IFSC code – SBIN0000096, State Bank of India • Jamshedpur Main branch, Jamshedpur, Jharkhand संपर्क-09334077378 लेखक: डॉ० मिथिलेश कुमार चौबे मूल्य :300 रूपये प्रकाशक: ज्ञान ज्योति रिसर्च फाउंडेशन, जमशेदपुर, झारखण्ड ISBN; 978-93-5416-405-7(First Edition)- 31-August 2020) ISBN :978-93-5457-769-7(2nd edition)- (16 April 2021) सिनोप्सिस: कोल्हानम गहन अनुसन्धान पर आधारित एक ऐतिहासिक उपन्यास है., जो झारखण्ड के आदिवासियों की ईसा-पूर्व 200 की एक कहानी को बेहद रोचक, और रहस्यमय अंदाज से कहता है. इसे एक महज उपन्यास कहना इस रचना के साथ बेइंसाफी होगी. यह दरअसल झारखण्ड के आदिवासियों का हजारों साल पुराना अनकहा इतिहास है. झारखण्ड के अनजान असुर स्थल, अति प्राचीन मंदिर, पुराणों में वर्...